Saturday, August 7, 2010

Hindi Khabar : 'अल्पसंख्यक कांग्रेस के दामाद हैं, तभी तो तुष्टिकरण में लगे रहते हैं नेता'

Hindi Khabar : 'अल्पसंख्यक कांग्रेस के दामाद हैं, तभी तो तुष्टिकरण में लगे रहते हैं नेता'

भोपाल, 7 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, RSS के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन ने फिर ज़हर उगला है। अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सुदर्शन ने कांग्रेस से पूछा है कि क्या अल्पसंख्यक आपके दामाद हैं, जो आप लोग उनके तुष्टिकरण में लगे रहते हैं? सुदर्शन ने ये सवाल भारत भवन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में पूछा। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस पूर्व बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यकों का देश के संसाधनों पर पहला हक है। परोक्ष रूप से सुदर्शन ने यह संकेत भी किया कि ऐसा कहना मानसिक असंतुलन का लक्षण है। संगोष्ठी में वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी सहित प्रदेश के संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और अन्य वक्ता उपस्थित थे।

संसद पर आतंकी हमले के आरोपी अफजल गुरू को कांग्रेस का दामाद बताए जाने संबंधी भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के बाद पूर्व संघ प्रमुख का यह बयान सामने आया है। इसे लेकर फिर कांग्रेस और भाजपा आमने सामने हो सकते हैं। सुदर्शन ने कहा कि इस देश के संसाधनों पर क्या राष्ट्र के सभी नागरिकों का हक नहीं है? ऐसा कहने की जरूरत क्यों पडी़? क्या अल्पसंख्यक उनके दामाद हैं?

सुदर्शन ने कहा कि देश संधिकाल से गुजर रहा है। कोई भी राष्ट्र जब ऐसी परिस्थितियों से गुजरता है तो उसके लक्षण पहले ही नजर आने लगते हैं। इन लक्षणों में आत्म-निर्वासन, हिंसात्मक अपराधों में वृद्धि, मानसिक असंतुलन, सामाजिक विघटन और धार्मिक आस्थाओं में वृद्धि शामिल हैं। इस स्थिति से गुजरने के बाद ही किसी राष्ट्र का पुनर्निर्माण होता है। भारत इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

2011 भारत के उत्थान का वर्ष उन्होंने स्वामी विवेकानंद और उनके गुरू रामकृष्ण परमहंस का उल्लेख करते हुए कहा कि परमहंस का जन्म 1836 में हुआ था। विवेकानंद ने उसे युगांतकारी घटना बताते हुए कहा था ऐसा समय हर 175 वर्षों के अंतराल पर आता है। उस दृष्टि से देखें तो 2011 में 175 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यानी भारत का उत्थान अगले वर्ष से आरंभ होगा।

3 comments:

  1. यानी भारत का उत्थान अगले वर्ष से आरंभ होगा.
    होना ही चाहिये.
    आर.एस.एस. प्रमुख के वक्तव्यों से तो ऐसा ही लगता है.
    तथास्तु.

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